लोकतंत्र के महापर्व में गुरुवार को असम, केरल और पुडुचेरी के मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाया। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन राज्यों में दशकों पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। विशेष रूप से असम और पुडुचेरी में मतदान का प्रतिशत उम्मीद से कहीं अधिक रहा है।
राज्यों का वोटिंग मीटर: कहाँ कितनी हुई वोटिंग?
| राज्य/UT | वोटिंग प्रतिशत | मुख्य आकर्षण |
| असम | 85.91% | 1950 में राज्य गठन के बाद अब तक की सबसे ज्यादा वोटिंग। |
| पुडुचेरी | 89.87% | आजादी के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड। |
| केरल | 78.27% | पिछले 49 सालों में दूसरी सबसे बड़ी वोटिंग। |
असम: ‘असमिया समाज’ बनाम ‘प्रतियोगिता’
असम की 126 सीटों पर इस बार मुकाबला दिलचस्प है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, इस बार पारंपरिक रूप से कम मतदान करने वाले ‘असमिया समाज’ ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। राज्य के साउथ सलमारा मनकचर जिले में सबसे ज्यादा 95.56% मतदान दर्ज किया गया, जो एक असाधारण आंकड़ा है।
केरल: परंपरा और बदलाव की जंग
केरल में इस बार मुकाबला ‘अनकही परंपरा’ को बचाने का है। पिछले 46 सालों से यहाँ हर 5 साल में सत्ता बदलने का रिवाज रहा है, जिसे 2021 में पिनराई विजयन ने तोड़ा था। इस बार भाजपा का मानना है कि महिला मतदाताओं की बढ़ी हुई संख्या उनके पक्ष में माहौल बना सकती है, वहीं लेफ्ट गठबंधन (LDF) इसे अपनी नीतियों की जीत मान रहा है।
पुडुचेरी: छोटी विधानसभा, बड़ा उत्साह
पुडुचेरी की मात्र 30 सीटों के लिए करीब 90% मतदान होना यह दर्शाता है कि स्थानीय मुद्दे वहां के मतदाताओं के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। यहाँ के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी खुद बाइक पर सवार होकर वोट डालने पहुंचे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं।
ग्राउंड जीरो से दिलचस्प तस्वीरें
चुनाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का भी है:
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असम: यहाँ महिलाएं अपने छोटे बच्चों को कंधे पर बांधकर लंबी कतारों में खड़ी नजर आईं।
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केरल: कोझिकोड में एक क्रिश्चियन दुल्हन अपनी शादी की रस्मों के बीच सीधे पोलिंग बूथ पहुंची।
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पुडुचेरी: आधुनिकता का परिचय देते हुए, कुछ केंद्रों पर रोबोट्स द्वारा मतदाताओं का स्वागत किया गया।
निष्कर्ष: क्या कहते हैं ये आंकड़े?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी मतदान का प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचता है, तो यह अक्सर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) या फिर किसी बड़े बदलाव का संकेत होता है। असम में बीजेपी की हैट्रिक की कोशिश है, तो केरल में लेफ्ट अपना किला बचाने की जद्दोजहद में है।
