झारखंड में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। रांची पुलिस ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय साल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस गैंग का सरगना कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) की नौकरी छोड़ चुका अतुल वत्स है।
रातों-रात अमीर बनने की चाहत ने बनाया अपराधी अतुल वत्स मूल रूप से बिहार के जहानाबाद का रहने वाला है। उसकी पत्नी एक डॉक्टर है और वह खुद बैंक में अधिकारी रह चुका है। अधिक पैसा कमाने के लालच में उसने दिल्ली के जालसाजों से सेटिंग और फर्जीवाड़े के गुर सीखे। वह पहले भी नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप में तिहाड़ जेल जा चुका है।
ऐसे बुना गया 23 करोड़ की ठगी का जाल पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 15-15 लाख रुपये की डील की थी।
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सीक्रेट लोकेशन: रांची के तमाड़ में एक निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज को ठिकाना बनाया गया था।
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रटवाए गए उत्तर: पुलिस ने छापेमारी के दौरान 159 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया, जिन्हें फर्जी प्रश्नपत्र देकर उत्तर रटवाए जा रहे थे।
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फर्जी निकला पेपर: जेएसएससी (JSSC) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि जब्त किए गए प्रश्नपत्र असली परीक्षा से मेल नहीं खाते थे। यह पूरी तरह से एक ठगी का हिस्सा था।
अभ्यर्थियों के लिए चेतावनी: करियर पर मंडराया खतरा आयोग ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। पकड़े गए 159 अभ्यर्थियों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि उन्हें आयोग की सभी भविष्य की परीक्षाओं से डिबार (प्रतिबंधित) कर दिया जाएगा।
नए कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान झारखंड में लागू नए कानून के तहत पेपर लीक या गंभीर कदाचार में शामिल होने पर निम्नलिखित सजा हो सकती है:
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10 साल से आजीवन कारावास तक की सजा।
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1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना।
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परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग पर 1 से 3 साल की जेल।
निष्कर्ष: यह मामला उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक सबक है जो शॉर्टकट के जरिए सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। ठग न केवल आपके पैसे लूटते हैं, बल्कि आपके सुनहरे भविष्य के दरवाजे भी हमेशा के लिए बंद करवा देते हैं।
