भारतीय ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टोरेंट पावर (Torrent Power) द्वारा नाभा पावर लिमिटेड (Nabha Power Ltd) के 100% अधिग्रहण के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह सौदा ₹6,889 करोड़ के विशाल उद्यम मूल्य (Enterprise Value) पर तय हुआ है।
क्या है यह पूरी डील? अधिग्रहण की इस प्रक्रिया में टोरेंट पावर, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की सहायक कंपनी ‘एल एंड टी पावर डेवलपमेंट’ से नाभा पावर की पूरी हिस्सेदारी खरीदेगी। इसमें 100% इक्विटी शेयरों के साथ-साथ वरीयता शेयरों (Preference Shares) का अधिग्रहण भी शामिल है।
क्यों खास है नाभा पावर लिमिटेड?
नाभा पावर, पंजाब के राजपुरा में स्थित एक अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट का संचालन करती है।
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क्षमता: 700 मेगावाट की दो इकाइयां (कुल 1400 मेगावाट)।
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परफॉरमेंस: वित्त वर्ष 2025 में इस प्लांट ने ₹4,866 करोड़ का राजस्व दर्ज किया।
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उपलब्धता: इस प्लांट की उपलब्धता दर (Plant Availability Factor) 95.36% रही है, जो इसे बेहद कुशल बनाती है।
टोरेंट पावर पर क्या होगा असर?
इस अधिग्रहण के बाद टोरेंट पावर की कुल परिचालन क्षमता में जबरदस्त उछाल आएगा:
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वर्तमान क्षमता: 5 गीगावाट (GW)
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नई क्षमता: 6.4 गीगावाट (GW)
मार्केट एक्सपर्ट का नजरिया: यह डील टोरेंट पावर को उत्तर भारत के ऊर्जा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद करेगी। साथ ही, L&T के लिए यह अपने गैर-प्रमुख (Non-core) एसेट्स को बेचकर मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा है।
सौदा पूरा होने की प्रक्रिया
सीसीआई (CCI) की मंजूरी मिलना इस डील की सबसे बड़ी बाधा को पार करना है। नियामक ने स्पष्ट किया कि इस अधिग्रहण से बाजार में प्रतिस्पर्धा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि यह बिजली क्षेत्र की स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम है।
