भारत और बांग्लादेश के बीच बीते कुछ समय से जारी कूटनीतिक तनाव के बाद अब रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। बुधवार को उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ गहन चर्चा की।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या हुई बात?
बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल की ओर से जारी बयान के अनुसार, खलीलुर रहमान ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को बांग्लादेश को सौंपने का अनुरोध दोहराया।
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बांग्लादेश का तर्क: वहां की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने हसीना को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
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भारत का रुख: फिलहाल भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि यह मुद्दा द्विपक्षीय सहयोग के अन्य रास्तों में बाधा नहीं बनना चाहिए।
वीजा नियमों में मिलेगी ढील
भारतीय पक्ष ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर दी है। बैठक के दौरान भारतीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि:
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आने वाले हफ्तों में मेडिकल और बिजनेस वीजा की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया जाएगा।
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वीजा मिलने में हो रही देरी को कम करने के लिए तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
‘बांग्लादेश प्रथम’ और नई विदेश नीति
खलीलुर रहमान ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश ‘बांग्लादेश प्रथम’ के सिद्धांत पर चलेगा। इस नीति के मुख्य स्तंभ निम्नलिखित होंगे:
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पारस्परिक विश्वास और सम्मान।
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दोनों देशों के बीच साझा लाभ के अवसर तलाशना।
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प्रत्यर्पण संधि के तहत कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना।
अहम जानकारी: अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक तख्तापलट के बाद से ही शेख हसीना नई दिल्ली में रह रही हैं। बीएनपी (BNP) सरकार के आने के बाद यह पहली उच्च स्तरीय यात्रा है, जिसे संबंधों में ‘रिसेट’ बटन के तौर पर देखा जा रहा है।
