उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए एक और बड़ी घोषणा की है। जेवर एयरपोर्ट के बाद अब इस क्षेत्र को ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ (Metro University) की सौगात मिलने जा रही है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई।
ग्रेटर नोएडा में मिली 26.1 एकड़ जमीन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने 26.1 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली है। यह विश्वविद्यालय सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित किया जाएगा। सरकार जल्द ही इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लागू करने जा रही है, जिससे इसके संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा।
किन जिलों के छात्रों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
मेट्रो विश्वविद्यालय का स्थान (Location) रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। यह न केवल नोएडा बल्कि आसपास के कई जिलों के छात्रों के लिए आधुनिक शिक्षा का केंद्र बनेगा:
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पश्चिमी यूपी: नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और अलीगढ़।
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ब्रज क्षेत्र: मथुरा और आगरा के छात्र।
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दिल्ली-NCR: दिल्ली और हरियाणा के नजदीकी इलाकों से कनेक्टिविटी आसान होगी।
इस यूनिवर्सिटी की खास बातें और उद्देश्य
योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश में निजी निवेश के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना है। इस विश्वविद्यालय के मुख्य आकर्षण होंगे:
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आधुनिक पाठ्यक्रम: यहाँ रोजगारपरक और आधुनिक तकनीक से जुड़ी शिक्षा पर जोर दिया जाएगा।
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: निजी निवेश के जरिए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
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रोजगार के अवसर: स्थानीय स्तर पर युवाओं को डिग्री के साथ-साथ प्लेसमेंट की बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
योगी कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले
केवल मेट्रो यूनिवर्सिटी ही नहीं, कैबिनेट ने शिक्षा और विकास से जुड़े कई और अहम निर्णय लिए हैं:
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गोरखपुर: कैंपियरगंज में 491 करोड़ की लागत से ‘वानिकी एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी’ बनेगी।
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मानदेय वृद्धि: शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी मुहर लगी है।
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डिजिटल इंडिया: युवाओं को टैबलेट और लैपटॉप वितरण की योजना को भी विस्तार दिया गया है।
