नई दिल्ली/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में ईरान द्वारा जारी एक वीडियो ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इस वीडियो में ईरान के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व मुस्तबा खमेनई को एक ‘वॉर रूम’ की ओर जाते देखा गया है। दावा किया जा रहा है कि ईरान का अगला निशाना इजरायल का सबसे सुरक्षित और गुप्त ठिकाना—डिमोना न्यूक्लियर रिएक्टर (Dimona Nuclear Reactor) हो सकता है।
क्या है ‘डिमोना’ और यह इतना खास क्यों है?
इजरायल के नागेव रेगिस्तान (Negev Desert) के बीचों-बीच स्थित डिमोना एक ऐसा शहर है, जो दुनिया के सबसे प्रतिबंधित हवाई क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
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अभेद्य सुरक्षा: यहाँ की सुरक्षा इतनी सख्त है कि इजरायल के अपने सैन्य विमान भी बिना विशेष अनुमति के इसके ऊपर से नहीं उड़ सकते।
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परमाणु रहस्य: आधिकारिक तौर पर इजरायल इसे एक परमाणु अनुसंधान केंद्र कहता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि इजरायल ने यहीं अपने लगभग 200 परमाणु बम तैयार किए हैं।
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स्थान: यह गल्फ ऑफ अकाबा के करीब स्थित है, जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
इजरायल के परमाणु बमों का ‘खुलासा’
इजरायल ने भारत की तरह ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इजरायल ने कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु बम हैं। हालांकि, 1986 में संडे टाइम्स की एक रिपोर्ट और इजरायली तकनीशियन मोर्डेचाई वानुनू द्वारा लीक की गई तस्वीरों ने दुनिया के सामने इजरायल के इस गुप्त परमाणु कार्यक्रम की पोल खोल दी थी।
ईरान की तैयारी और ‘परमाणु’ अंदेशा
ईरान और अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) के बीच जुबानी जंग तेज है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्टें चिंता बढ़ा रही हैं:
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यूरेनियम संवर्धन: रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने यूरेनियम को 70% तक संवर्धित (Enrich) कर लिया है।
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मिलिट्री ग्रेड की ओर कदम: विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में इसे 90% (मिलिट्री ग्रेड) तक पहुंचाने में ईरान को एक महीने से भी कम समय लगेगा।
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ईरान का ‘सरप्राइज’: ईरान ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि उसने ट्रंप प्रशासन के लिए एक ‘सरप्राइज’ बचाकर रखा है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ परमाणु परीक्षण से जोड़कर देख रहे हैं।
शांति की कोशिशें: क्या टल जाएगा युद्ध?
तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ के जरिए दोनों देशों के बीच 45 दिनों के सीजफायर (Ceasefire) की मध्यस्थता करने का प्रयास कर रहा है। यदि यह सफल होता है, तो क्षेत्र को बड़े विनाश से बचाया जा सकता है।
