देश में रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक दूरदर्शी कदम उठाया है। सरकार ने काउंटर-टॉप इंडक्शन हॉब्स (Induction Stoves) के लिए अनिवार्य ‘स्टार लेबलिंग’ कार्यक्रम को लागू करने की डेडलाइन 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दी है।
अब इंडक्शन स्टोव बनाने वाली कंपनियों के लिए सख्त ऊर्जा दक्षता मानक (Energy Efficiency Norms) 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
एलपीजी संकट और सरकार की रणनीति
वर्तमान में मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव के कारण कुकिंग गैस की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सरकार का फोकस अब ‘इलेक्ट्रिक कुकिंग’ को बढ़ावा देने पर है। नियमों में दी गई इस ढील का मुख्य उद्देश्य बाजार में इंडक्शन स्टोव की उपलब्धता बनाए रखना है ताकि लोग गैस सिलेंडर के विकल्प के रूप में इसे आसानी से अपना सकें।
इंडक्शन हॉब्स क्यों हैं बेहतर?
अगर आप एलपीजी के विकल्प की तलाश में हैं, तो इंडक्शन स्टोव एक स्मार्ट निवेश हो सकता है। यहाँ इसके कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं:
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ऊर्जा की बचत: यह पारंपरिक इलेक्ट्रिक हीटर की तुलना में काफी कम बिजली खर्च करता है।
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सुरक्षा: इंडक्शन की सतह तब तक गर्म नहीं होती जब तक उस पर पैन न रखा जाए। इससे जलने का खतरा कम रहता है।
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तेजी से खाना बनाना: इसमें गर्मी सीधे बर्तन में पैदा होती है, जिससे खाना जल्दी पकता है और समय की बचत होती है।
क्या है ‘स्टार लेबलिंग’ कार्यक्रम?
जैसे फ्रिज या एसी पर ‘स्टार रेटिंग’ (1-5 सितारे) होती है, जो बताती है कि वह उपकरण कितनी बिजली बचाएगा, वैसी ही व्यवस्था इंडक्शन स्टोव के लिए भी अनिवार्य की जा रही है। समयसीमा बढ़ने से कंपनियों को अपने उत्पादों को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने का पर्याप्त समय मिल गया है, जिसका फायदा अंततः उपभोक्ताओं को कम बिजली बिल के रूप में मिलेगा।
विशेषज्ञ की राय: सरकार का यह फैसला न केवल उपभोक्ताओं को तात्कालिक राहत देगा, बल्कि भविष्य में भारत को ईंधन के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम करने में भी मदद करेगा।
