पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के $100 प्रति बैरल के पार पहुंचने के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की अहम बैठक आज से शुरू हो गई है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक के नतीजों का ऐलान 8 अप्रैल को किया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव (Global Headwinds) सबसे अधिक है।
बैठक के 3 सबसे बड़े एजेंडे
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महंगाई पर लगाम: ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल और अन्य जिंसों (Commodities) की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा है।
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रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 के स्तर को पार कर गया है। आरबीआई को रुपये को संभालने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
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ब्याज दर (Repo Rate): क्या केंद्रीय बैंक रेपो रेट को मौजूदा 5.25% पर बरकरार रखेगा या महंगाई रोकने के लिए इसे बढ़ाएगा?
विशेषज्ञों की राय: क्या बढ़ेगी आपकी EMI?
ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल आरबीआई ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की नीति अपना सकता है।
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ICRA की राय: मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, कच्चे तेल की अनिश्चितता को देखते हुए फिलहाल दरों में बदलाव की संभावना कम है।
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SBI का अनुमान: सौम्य कांति घोष का कहना है कि रुपया 93 के ऊपर है और सुपर अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में आरबीआई अपनी टिप्पणी में काफी सावधानी बरतेगा।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है, तो बैंकों से मिलने वाले सभी तरह के लोन (Home, Car, Personal Loan) महंगे हो जाएंगे। हालांकि, अगर दरें स्थिर रहती हैं, तो आपकी मौजूदा EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।
